रायपुर : 

कभी धान की पारंपरिक खेती के लिए पहचाने जाने वाला धमतरी जिला अब कृषि नवाचार की नई मिसाल बनता जा रहा है। यहां के किसान फसलचक्र परिवर्तन अपनाकर कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल खेती की तस्वीर बदली है, बल्कि किसानों की सोच और संसाधनों के उपयोग में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
     जिला प्रशासन की दूरदर्शी पहल में फसलचक्र परिवर्तन को एक जन-अभियान का रूप दिया गया है। किसानों को जागरूक करने, प्रशिक्षण देने और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के प्रयासों ने इस पहल को सफल बनाया है। कृषि विभाग की टीम ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों से संवाद स्थापित किया, जिससे उनमें नई फसलों के प्रति विश्वास मजबूत हुआ।
      ग्राम गट्टासिल्ली तालपारा के किसान रामप्रकाश नेताम इस परिवर्तन के प्रेरक उदाहरण हैं। पहले वे केवल धान की खेती करते थे, लेकिन अब 3.5 एकड़ में मक्का की खेती कर बेहतर उत्पादन और आय अर्जित कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत तकनीकों, कीट प्रबंधन और फसल देखरेख के बेहतर तरीकों को अपनाया है, जिससे उनकी खेती अधिक लाभकारी बन गई है।
       रामप्रकाश जैसे सैकड़ों किसानों ने मक्का सहित अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। खेतों में लहराती मक्का की फसल इस सकारात्मक बदलाव की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि खेती का जोखिम भी कम हुआ है।
       फसलचक्र परिवर्तन का पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों के कारण सिंचाई पर दबाव घटा है, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण हो रहा है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल रही है। साथ ही, विविध फसलों की खेती से भूमि की उर्वरता में भी सुधार हुआ है।
     यह पहल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय को स्थायी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। धमतरी में फसलचक्र परिवर्तन अब एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए कृषि नवाचार और सतत विकास का प्रेरणास्रोत बनेगा।