​चिरमिरी :

कोयलांचल नगरी चिरमिरी में इस समय विकास के दावों और धरातल की हकीकत के बीच भारी खाई नजर आ रही है। पानी की बूंद-बूंद को तरसती जनता और जर्जर सड़कों के मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट और तीखे कार्टून प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
​सत्ता के ‘ट्रिपल इंजन’ पर विपक्ष का प्रहार
​सोशल मीडिया पर सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भाजपा की ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार को आड़े हाथों लिया है। वायरल पोस्ट्स में आरोप लगाया जा रहा है कि पिछले ढाई वर्षों में भाजपा शासन के दौरान पानी की किल्लत अपने चरम पर पहुँच गई है। तुलनात्मक रूप से दावा किया जा रहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के पांच वर्षों में स्थिति इतनी भयावह कभी नहीं थी।
​सोशल मीडिया पर छिड़ा ‘मेम-युद्ध’: महापौर और मंत्री निशाने पर
​शहर की दुर्दशा को दर्शाने के लिए नागरिक अब रचनात्मक विरोध का सहारा ले रहे हैं। एक वायरल कार्टून में “स्वागत है चिरमिरी नगर मगर…” के बोर्ड के साथ महापौर को जेसीबी पर सवार दिखाया गया है, जिसमें तंज कसा गया है कि एक साल बीतने के बाद भी न सड़क बनी, न पानी मिला।
​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन “रील बनाने” और सोशल मीडिया पर चमकने में व्यस्त है, जबकि जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रदर्शन करने को मजबूर है।
​गंभीर आरोप: मास्टर प्लान नहीं, कमीशन पर ध्यान
​चिरमिरी के प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि:
​नियोजन का अभाव: शहर के पास भविष्य के लिए कोई ‘मास्टर प्लान’ नहीं है।
​भ्रष्टाचार की बू: आरोप है कि कोयला क्षेत्र और अन्य परियोजनाओं में केवल मोटा कमीशन वसूलने पर ध्यान दिया जा रहा है।
​विपक्ष की भूमिका: आम जनता में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि वर्तमान विपक्ष (कांग्रेस) भी इन मुद्दों पर उतनी प्रखरता से आवाज नहीं उठा पा रहा है, जितनी उम्मीद की जा रही थी।
​”कांग्रेस के समय विपक्ष चुप नहीं रहता था, आज विपक्ष की चुप्पी भी जनता को खल रही है। आखिर हमारी समस्याओं का समाधान कौन करेगा?”
— बरुण शर्मा, स्थानीय नागरिक (सोशल मीडिया टिप्पणी)
​सड़कों पर सन्नाटा, सोशल मीडिया पर शोर
​ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, चिरमिरी की प्रमुख सड़कों की हालत इतनी खराब है कि आवागमन दूभर हो गया है। वहीं, पेयजल की समस्या ने गृहणियों और आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासन की ओर से अब तक इन वायरल हो रहे आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
​संपादकीय टिप्पणी: लोकतंत्र में जनता का फीडबैक सबसे बड़ा आईना होता है। यदि सोशल मीडिया पर इस तरह का आक्रोश पनप रहा है, तो यह प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। समय रहते यदि जल संकट और सड़कों की स्थिति नहीं सुधारी गई, तो यह गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है।