सीबीआई निदेशक अलोक वर्मा को पद से हटाने वाली कमेटी में शामिल सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस ए के सीकरी अब सीबीआई विवाद को खत्म होते देखना चाहते हैं. साथ ही वह अब छुट्टी पर जाने से जुड़े विवाद को भी बंद करना चाहते हैं, उन्होंने इच्छा जताई है कि अब इन सभी बातों पर पर्दा डलना चाहिए. हालांकि कुछ वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि जस्टिस सीकरी को निशाने बनाने के मकसद से इस विवाद को तूल दिया जा रहा है.

जस्टिस सीकरी ने पूर्व चीफ जस्टिस वाई के सभरवाल के जीवन पर आधारित किताब लॉन्च के मौके पर एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि यह विवाद और खिंचे, मैं चाहता हूं कि यह खत्म हो.’ हालांकि उन्होंने इस मामले में और ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

केंद्र सरकार की ओर से पिछले साल जस्टिस सीकरी को राष्ट्रमंडल सचिवालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (सीएसएटी) में नियुक्ति का ऑफर किए जाने पर रविवार को विवाद शुरू हो गया था. इससे 3 दिन पहले ही प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने का फैसला किया था. इस कमेटी में जस्टिस सीकरी चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल थे. जस्टिक सीकरी के वोट से आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाने के फैसले में मदद मिली थी.

इस विवाद से आहत के होने के बाद सीएसएटी में नियुक्ति संबंधी सरकार की पेशकश पर जस्टिस सीकरी ने अपनी सहमति वापस ले ली. जस्टिस सीकरी सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के बाद सबसे वरिष्ठ जज हैं. सोमवार को कार्यक्रम में भी वह मीडिया के दूरी बनाते दिखे. इस मामले पर पूर्व एटॉर्नी जनरल मुकल रोहतगी ने कहा कि कुछ नेताओं और कार्यकर्ता और वकीलों की ओर से जस्टिस सीकरी को गलत तरीके से निशाना बनाया गया है.

मुकुल रोहतगी ने कहा कि इन दोनों विषयों का आपस में कोई लिंक नहीं है और जो लोग तथ्यों को नहीं जानते और दोनों चीजों के हालात को नहीं जानते, वे आरोप लगाने में आगे हैं. उन्होंने कहा कि लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण है.

पूर्व एटॉर्नी जनरल रोहतगी ने कुछ कार्यकर्ता-वकीलों की आलोचना की जिन्होंने सोशल मीडिया पर जस्टिस सीकरी की छवि खराब करने की कोशिश की. रोहतगी ने कहा कि ऐसे लोग तथ्यों को जाने बिना सिर्फ प्रचार चाहते हैं. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अजीत कुमार सिन्हा और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने भी उनके विचार को साझा किया.

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह पहले ही कह चुकी हैं कि अगर जस्टिस सीकरी को CBI मामले पर चयन समिति के फैसले पर विवाद की उम्मीद थी तो उन्हें इस समिति में शामिल नहीं होना चाहिए था. साथ ही उन्होंने कहा था कि जस्टिस को लंदन कोर्ट में नियुक्त को लेकर अपना पक्ष चयन समिति में शामिल होने से पहले ही रख देना चाहिए था.

जस्टिस सीकरी की ओर से सरकार की पेशकश ठुकाराने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता जस्टिस के फैसले के बहाने मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं. कांग्रेस इस विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप लगा रही है.

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